सीएम धामी ने विकास कार्यों और आपदा प्रभावित परिवारों के लिए दी वित्तीय स्वीकृति, संसारी माता मंदिर के जीर्णोद्धार को ₹49.95 लाख मंजूर

सीएम धामी ने विकास कार्यों और आपदा प्रभावित परिवारों के लिए दी वित्तीय स्वीकृति, संसारी माता मंदिर के जीर्णोद्धार को ₹49.95 लाख मंजूर

देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में विकास कार्यों को गति देने और आपदा प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान करने के लिए विभिन्न वित्तीय स्वीकृतियों को मंजूरी दी है। इसके तहत देहरादून में संसारी माता मंदिर के जीर्णोद्धार का शेष कार्य पूरा करने, पिथौरागढ़ जिले में पुलिया निर्माण तथा उत्तरकाशी जिले में अतिवृष्टि एवं भूस्खलन से प्रभावित परिवारों को किराये के भवन में रहने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

संसारी माता मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए ₹49.95 लाख मंजूर

मुख्यमंत्री ने देहरादून जिले के धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड संख्या 86, सेवलाकलां स्थित संसारी माता मंदिर के जीर्णोद्धार के अवशेष कार्य को पूरा करने के लिए ₹49.95 लाख की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। इस धनराशि से मंदिर के शेष जीर्णोद्धार कार्य को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

पिथौरागढ़ के गराली में ₹58.14 लाख से बनेगी पुलिया

पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र के गराली में पुलिया निर्माण के लिए ₹58.14 लाख की स्वीकृति को मुख्यमंत्री ने अनुमोदन प्रदान किया है। इसके तहत प्रथम किश्त के रूप में ₹34.88 लाख की धनराशि स्वीकृत करने का भी अनुमोदन दिया गया है। इस निर्माण कार्य से क्षेत्र में स्थानीय आवागमन संबंधी सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

आपदा प्रभावित पांच परिवारों को छह माह तक मिलेगा किराया

मुख्यमंत्री ने उत्तरकाशी जिले की नगर पंचायत नौगांव के वार्ड संख्या 7, सौली में अतिवृष्टि एवं भूस्खलन से प्रभावित पांच परिवारों को सुरक्षा की दृष्टि से अन्यत्र किराये के भवनों में रखने के लिए ₹1.20 लाख की धनराशि स्वीकृत करने का अनुमोदन दिया है।

स्वीकृत प्रावधान के अनुसार, प्रत्येक प्रभावित परिवार को प्रतिमाह ₹4,000 की दर से छह माह तक किराये की सहायता दी जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर रहने की सुविधा उपलब्ध कराना है।

राज्य सरकार की इन स्वीकृतियों के माध्यम से एक ओर स्थानीय विकास एवं निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और अस्थायी आवास की जरूरतों को भी प्राथमिकता दी गई है।