राजनाथ सिंह का कांग्रेस पर वार, बोले- देश में अराजकता फैलाने की कोशिश

राजनाथ सिंह का कांग्रेस पर वार, बोले- देश में अराजकता फैलाने की कोशिश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भारत की बढ़ती ताकत और प्रगति कुछ शक्तियों को रास नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि दशकों से चुनाव हार रहे राजनीतिक दल जाने-अनजाने में ऐसी शक्तियों के हाथों में खेलते नजर आ रहे हैं। राजनाथ सिंह के मुताबिक, दिल्ली में हो रही घटनाएं संवैधानिक व्यवस्था के बजाय अराजकता के जरिए देश की प्रगति को बाधित करने के प्रयास को दर्शाती हैं।

राजनाथ सिंह ने ‘रेजीम चेंज’ और ‘रेजिस्टेंस’ जैसे शब्दों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने चौरी-चौरा की घटना को याद करते हुए कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में हिंसा होने के बाद महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन रोक दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी जी का उत्तराधिकारी होने का दावा करने वाली कांग्रेस आज अराजकता की बातें करके अपनी राजनीतिक पराजय का बदला देश से लेना चाहती है।

राजनाथ सिंह ने इसे कांग्रेस के नैतिक मूल्यों के पतन की पराकाष्ठा बताया। रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस देश को हिंसा और अराजकता की आग में झोंकना चाहती है और बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा करने का सपना देख रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में कांग्रेस ने गांधी नाम का इस्तेमाल करने का अपना नैतिक अधिकार पूरी तरह खो दिया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस 37 साल से सत्ता से बाहर है। उन्होंने सवाल उठाया कि यह स्थिति वोट चोरी की वजह से है या काम चोरी की वजह से, इसे देश की जनता अच्छी तरह समझती है।

राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने पूछा, “क्या Samajwadi Party के बगैर आप अपनी Raebareli की seat भी जीतने का सामर्थ्य रखते हैं या नहीं रखते हैं?” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस की प्रदेश इकाई के नेता आपस में भरोसा नहीं करते और मौखिक विवादों के साथ शारीरिक रूप से भी लड़ते दिखाई दिए हैं। राजनाथ सिंह ने कांग्रेस से पूछा कि उत्तर प्रदेश में पार्टी के नेताओं के बीच जारी विवादों के लिए क्या भाजपा जिम्मेदार है।

उन्होंने कहा कि देश में अराजकता पैदा करने की बात करने वाली कांग्रेस को पहले अपनी उत्तर प्रदेश इकाई की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उनके बयान का मुख्य संदेश यही रहा कि कांग्रेस को देश की राजनीतिक परिस्थितियों पर सवाल उठाने से पहले अपने संगठन के भीतर की समस्याओं का जवाब देना चाहिए।