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यूपी सामूहिक विवाह योजना: 28,833 जोड़ों का विवाह, 1.16 लाख आवेदन

Bindu Mishra
October 22, 2026
4 min read
यूपी सामूहिक विवाह योजना: 28,833 जोड़ों का विवाह, 1.16 लाख आवेदन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों का विवाह सम्मानपूर्वक संपन्न कराने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 28,833 जोड़ों का विवाह कराया जा चुका है। प्रदेश सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में कुल 72,540 जोड़ों के विवाह का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं, योजना के लिए अब तक 1,16,668 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

समाज कल्याण विभाग की इस योजना के तहत पात्र परिवारों को विवाह के अवसर पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके साथ ही सामूहिक विवाह समारोहों के माध्यम से सामाजिक समरसता और समानता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को बेटियों की शादी पर होने वाले आर्थिक खर्च का बोझ कम करने में मदद देना है।

सामूहिक विवाह योजना के लिए 1.16 लाख से अधिक आवेदन

समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक प्रदेशभर से 1,16,668 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 34,845 आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं, जबकि जांच के दौरान 11,679 आवेदन अपात्र पाए गए हैं। शेष आवेदनों की जांच और पात्रता से जुड़ी प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में 72,540 जोड़ों के विवाह का लक्ष्य रखा है। अब तक 28,833 जोड़ों के विवाह संपन्न होने के साथ योजना के तहत आगे भी पात्र लाभार्थियों को शामिल करने की प्रक्रिया जारी है।

हरदोई पहले और सीतापुर दूसरे स्थान पर

जिलावार आंकड़ों के अनुसार, हरदोई में 1,385 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया है, जिसके साथ जिला प्रदेश में पहले स्थान पर है। सीतापुर में 1,335 जोड़ों का विवाह हुआ है।

इसके अलावा, आजमगढ़ में 1,242 और पीलीभीत में 1,271 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया है। ये आंकड़े प्रदेश के विभिन्न जिलों में योजना के तहत आयोजित विवाह समारोहों की प्रगति को दर्शाते हैं।

एक जोड़े के विवाह पर एक लाख रुपये की सहायता का प्रावधान

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रत्येक जोड़े के विवाह पर कुल एक लाख रुपये की सहायता का प्रावधान है। निर्धारित राशि को अलग-अलग मदों में खर्च करने की व्यवस्था की गई है।

योजना के अनुसार, 64 हजार रुपये कन्या के बैंक खाते में गृहस्थी बसाने के लिए दिए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, 21 हजार रुपये वैवाहिक उपहार सामग्री के लिए निर्धारित हैं, जबकि 15 हजार रुपये विवाह समारोह की आवश्यक व्यवस्थाओं पर खर्च किए जाते हैं।

इस सहायता का उद्देश्य विवाह के दौरान परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करना और नवदंपती को नई गृहस्थी शुरू करने में सहयोग देना है। योजना के तहत लाभ पात्रता संबंधी निर्धारित शर्तों के अधीन दिया जाता है।

ई-केवाईसी और डिजिटल सत्यापन से पारदर्शिता पर जोर

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। आवेदकों के सत्यापन के लिए ई-केवाईसी की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से आय और जाति प्रमाणपत्रों का डिजिटल सत्यापन किया जाता है।

योजना में आधार आधारित भुगतान व्यवस्था के जरिए पात्र लाभार्थियों के आधार से जुड़े बैंक खातों में सहायता राशि पहुंचाने का प्रावधान है। इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य लाभार्थियों की पात्रता की जांच करना और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार सहायता उपलब्ध कराना है।

जरूरतमंद परिवारों को विवाह में आर्थिक सहयोग

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए विवाह के खर्च में सहयोग देने वाली सरकारी पहल है। योजना के तहत सामूहिक समारोहों में विवाह संपन्न कराए जाते हैं और निर्धारित प्रावधानों के अनुसार पात्र जोड़ों को सहायता दी जाती है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में 72,540 जोड़ों के विवाह का लक्ष्य और अब तक प्राप्त 1,16,668 आवेदन योजना के प्रति मांग को दर्शाते हैं। आगे पात्र आवेदनों की जांच और विवाह समारोहों के आयोजन के साथ योजना का लक्ष्य पूरा करने की दिशा में काम किया जाएगा।

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