राष्ट्रधर्म, शिक्षा और लोक कल्याण को आजीवन समर्पित रहे महंत दिग्विजयनाथ

गोरखपुर। राष्ट्रीयता, कृतज्ञता, सांस्कृतिक स्वाभिमान और गुरु-परंपरा के प्रति अटूट निष्ठा की संवाहक गोरक्षपीठ में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी पितरों (पूर्वजों) की स्मृति

अहर्निश प्रासंगिक हैं युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के विचार

गोरखपुर । कर्ता के प्रति कृतज्ञता का भाव व्यक्त करने, विरासत पर गौरव की अनुभूति करने और गुरु के प्रति सम्मान प्रकट करने की सनातनी