अखिलेश यादव को बड़ा झटका, अभय सिंह समेत तीन नेताओं ने थामा BJP का दामन

अखिलेश यादव को बड़ा झटका, अभय सिंह समेत तीन नेताओं ने थामा BJP का दामन

उत्तर प्रदेश में बुधवार को समाजवादी पार्टी के तीन विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया। इनमें गौरीगंज से लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीतने वाले राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या की गोसाईंगंज सीट से विधायक अभय सिंह और जालौन की कालपी सीट के विधायक विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं। गौरीगंज में जामो रोड स्थित राकेश प्रताप सिंह के आवास मंगलम पर आयोजित कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और पार्टी की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी ने तीनों को सदस्यता दिलाई। इस दौरान उन्हें भगवा पटका पहनाकर पार्टी में स्वागत किया गया।

कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के कई मंत्री, विधायक और भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। तीनों विधायकों के समर्थकों की भी बड़ी संख्या में जुटान हुई। आयोजन स्थल पर बनाए गए पंडाल में लगभग पांच हजार कुर्सियां लगाई गई थीं। पार्टी में शामिल होने की औपचारिक प्रक्रिया के तहत तीनों विधायकों ने भाजपा के टोल फ्री नंबर पर फोन करके सदस्यता भी ली।

2024 के राज्यसभा चुनाव में बदला था रुख

राकेश प्रताप सिंह का समाजवादी पार्टी से राजनीतिक सफर वर्ष 2012 में शुरू हुआ था, जब उन्होंने पहली बार गौरीगंज विधानसभा सीट से जीत हासिल की। वर्ष 2017 और 2022 में भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी। हालांकि, वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी के रुख से अलग भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में मतदान किया। इसके बाद सपा ने जून 2025 में उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। अब भाजपा की सदस्यता लेकर उन्होंने अपने अगले राजनीतिक कदम का औपचारिक ऐलान कर दिया है।

700 जनप्रतिनिधियों को साथ लाने का दावा

भाजपा में शामिल होने से पहले राकेश प्रताप सिंह ने कहा था कि गौरीगंज क्षेत्र के करीब 700 ग्राम प्रधान, पूर्व प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य उनके साथ भाजपा में आ सकते हैं। अब यह देखना होगा कि उनके दावे के अनुसार कितने स्थानीय जनप्रतिनिधि और समर्थक पार्टी में शामिल होते हैं। इससे क्षेत्र में भाजपा के संगठनात्मक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।

भाजपा और सपा के सामने नई चुनौती

राकेश प्रताप सिंह के भाजपा में आने के बाद गौरीगंज में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। उनके तीन बार विधायक चुने जाने और स्थानीय स्तर पर समर्थकों के नेटवर्क को देखते हुए उनकी भूमिका पर नजर रहेगी। वहीं, समाजवादी पार्टी के लिए अपने पुराने राजनीतिक आधार को संभालना अहम होगा। भाजपा को भी स्थानीय संगठन के साथ नए नेताओं और उनके समर्थकों के बीच समन्वय बनाना होगा। आने वाले दिनों में इन बदलावों का असर क्षेत्र की राजनीति में किस रूप में सामने आता है, यह महत्वपूर्ण रहेगा।