तकनीकी और एआई के दौर में साहित्य की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण: आनंद वर्द्धन

तकनीकी और एआई के दौर में साहित्य की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण: आनंद वर्द्धन

हरिद्वार। दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) रानीपुर के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘द गोल्डन जुबली लिटरेसी फेस्टिवल-गोल्डन कंटिन्यूम : स्वर्ण अक्षर-2026’ में साहित्य, संस्कृति और शिक्षा का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य सचिव ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन हुआ। समारोह में विद्यालय की पांच दशक लंबी यात्रा, उपलब्धियों और विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।

‘स्वर्ण अक्षर’ नाम में छिपा है विशेष अर्थ

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने कहा कि ‘स्वर्ण अक्षर’ नाम अपने आप में विशेष अर्थ रखता है। स्वर्ण अनमोलता का प्रतीक है, जबकि अक्षर मानव मन के विचारों, कल्पना और अभिव्यक्ति की शक्ति का माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान के लिए 50 वर्षों की यात्रा महत्वपूर्ण उपलब्धि और गौरव का विषय है।

उन्होंने कहा कि किसी संस्था का निर्माण केवल कक्षाओं और भवनों से नहीं होता, बल्कि विद्यार्थियों, शिक्षकों और उससे जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के योगदान से होता है। डीपीएस रानीपुर की पांच दशक की यात्रा में भी शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

तकनीकी युग में साहित्य की भूमिका और बढ़ी

मुख्य सचिव ने कहा कि वर्तमान समय तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है। ऐसे दौर में साहित्य की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि हमारे आसपास उपलब्ध सूचनाओं की मात्रा को मात्र ज्ञान नहीं कहा जा सकता। साहित्य व्यक्ति को प्रश्न पूछने, चिंतन करने और अपने ज्ञान का निरंतर विस्तार करने की क्षमता प्रदान करता है।

उन्होंने उत्तराखंड की हिमालयी विरासत, लोक परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम तक सीमित न रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि छात्रों को अधिक से अधिक साहित्य पढ़ना चाहिए और निरंतर सीखने की आदत विकसित करनी चाहिए।

विद्यार्थियों से तीन सवाल पूछने का आह्वान

मुख्य सचिव ने विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें समय-समय पर स्वयं से तीन सवाल जरूर पूछने चाहिए—मैंने क्या सीखा? मैंने क्या योगदान दिया? और मैंने किसकी मदद की? उन्होंने कहा कि इन सवालों के माध्यम से विद्यार्थी अपने व्यक्तिगत विकास के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी समझ सकते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे आधुनिकता और तकनीकी बदलावों को खुले मन से अपनाएं, लेकिन इसके साथ ही अपनी संस्कृति, परंपराओं और जड़ों से जुड़े रहें। उन्होंने विद्यालय के विकास में योगदान देने वाले शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि डीपीएस रानीपुर के विद्यार्थी विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

समारोह में डीपीएस रानीपुर की 50 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा पर आधारित शॉर्ट फिल्म का प्रदर्शन किया गया। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न शास्त्रीय एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों पर कार्यक्रम स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष आशुतोष शर्मा, शिवालिक नगर पालिका अध्यक्ष राजीव शर्मा, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, बीएचईएल के चीफ फाइनेंस ऑफिसर राजेश कुमार द्विवेदी, बीएचईएल के कार्यकारी निदेशक रंजन कुमार, डीपीएस रानीपुर के प्रधानाचार्य अनुपम जग्गा, वाइस प्रिंसिपल डॉ. पविंदर सिंह, वाइस प्रिंसिपल एकेडमिक्स अनुपमा श्रीवास्तव और प्रो-वाइस चेयरमैन एन.एस. राणा सहित शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं एवं अभिभावक मौजूद रहे।