कौन हैं डॉ. ढाल सिंह बिसेन? 2019 में बने सांसद, अब संभालेंगे उत्तराखंड के राज्यपाल की जिम्मेदारी

कौन हैं डॉ. ढाल सिंह बिसेन? 2019 में बने सांसद, अब संभालेंगे उत्तराखंड के राज्यपाल की जिम्मेदारी

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजभवन में बड़ा बदलाव हुआ है। मध्य प्रदेश के वरिष्ठ बीजेपी नेता और पूर्व सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। लंबे राजनीतिक अनुभव वाले बिसेन अब लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह की जगह राज्यपाल की जिम्मेदारी संभालेंगे।

कौन हैं ढाल सिंह बिसेन?

डॉ. ढाल सिंह बिसेन मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के रहने वाले हैं। उनका जन्म 14 मई 1952 को पिपरिया गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम सेवाराम बिसेन और माता का नाम सोनाबाई बिसेन था। उनकी पत्नी का नाम भानुमती बिसेन है। महाकौशल क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहने वाले बिसेन की पहचान बीजेपी के अनुभवी नेताओं में रही है। राजनीति के अलावा उनका जुड़ाव चिकित्सा व्यवसाय और कृषि से भी रहा है।

चार बार विधानसभा चुनाव जीता

बिसेन ने पहली बार 1990 में मध्य प्रदेश विधानसभा का चुनाव जीता। इसके बाद 1993, 1998 और 2003 में भी वह विधायक चुने गए। मध्य प्रदेश सरकार में रहते हुए उन्होंने वन, परिवहन, खनिज संसाधन, स्कूल शिक्षा और जेल जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। बाद में वह मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष भी रहे।

बालाघाट से सांसद भी रहे

2019 में बीजेपी ने बिसेन को बालाघाट लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा था। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी मधु भगत को 2.42 लाख से अधिक मतों के अंतर से हराया। वह 2024 तक सांसद रहे। विधायक, मंत्री और सांसद के रूप में उनका लंबा राजनीतिक अनुभव अब उत्तराखंड के संवैधानिक पद पर उनके काम आएगा।

पवार समुदाय से आते हैं बिसेन

ढाल सिंह बिसेन पवार समुदाय से आते हैं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों में उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि का उल्लेख मिलता है। मध्य प्रदेश में पवार समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC से जोड़ा जाता है। हालांकि उत्तराखंड और मध्य प्रदेश की सामाजिक संरचना अलग है, इसलिए उनकी नियुक्ति को सीधे उत्तराखंड के किसी एक जातीय समूह से जोड़कर देखना आसान नहीं होगा।

चिकित्सा से भी रहा जुड़ाव

बिसेन ने रायपुर के छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक कॉलेज से चिकित्सा से संबंधित शिक्षा हासिल की है। लोकसभा के आधिकारिक परिचय के मुताबिक उनकी शैक्षिक योग्यता एवीएमएस और डीएचबी है। राजनीति में आने के बाद उन्होंने विधायी कार्यों के साथ विभिन्न प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभाईं।

2027 चुनाव से पहले OBC संदेश की चर्चा

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण उनकी नियुक्ति के सामाजिक और राजनीतिक संदेश को लेकर चर्चा शुरू हो सकती है। बीजेपी राज्य में अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच अपना जनाधार बनाए रखने की कोशिश करती रही है। ऐसे में बिसेन की OBC पृष्ठभूमि को पार्टी के व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व के संदर्भ में भी देखा जा सकता है, हालांकि राज्यपाल का पद संवैधानिक और गैर-दलीय होता है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि वाला राज्यपाल नया प्रयोग नहीं

उत्तराखंड में राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं का राज्यपाल बनना पहली बार नहीं है। इससे पहले भगत सिंह कोश्यारी, बेबी रानी मौर्य और अजीज कुरैशी भी इस पद पर रह चुके हैं। हालांकि इस बार बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले राजभवन की जिम्मेदारी सेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह के पास थी। अब लंबे राजनीतिक अनुभव वाले बिसेन को यह जिम्मेदारी मिली है।

चुनाव में नहीं होगी दलगत भूमिका

2027 के विधानसभा चुनाव में राज्यपाल की कोई दलगत चुनावी भूमिका नहीं होगी। उन्हें संविधान के दायरे में रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा। हालांकि चुनाव के बाद सरकार गठन, विधानसभा से जुड़े संवैधानिक कामकाज और अन्य औपचारिक प्रक्रियाओं में राज्यपाल की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

नई जिम्मेदारी के साथ बड़ी चुनौती

राजनीतिक जीवन के लंबे अनुभव के बाद बिसेन अब संवैधानिक पद संभालने जा रहे हैं। उनके सामने राजभवन की जिम्मेदारियों को राजनीतिक भूमिका से अलग रखते हुए संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप काम करने की चुनौती होगी। उनकी नियुक्ति को लेकर सामाजिक और राजनीतिक चर्चाएं जारी रह सकती हैं, लेकिन उनके कार्यकाल का वास्तविक आकलन राजभवन से जुड़े संवैधानिक फैसलों और उनके निर्वहन से होगा।