परगट सिंह कल संभालेंगे पंजाब कांग्रेस की कमान, गुटबाजी से निपटना होगी बड़ी चुनौती

परगट सिंह कल संभालेंगे पंजाब कांग्रेस की कमान, गुटबाजी से निपटना होगी बड़ी चुनौती

चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह रविवार, 11 अक्टूबर को औपचारिक रूप से पदभार संभालेंगे। चंडीगढ़ के सेक्टर-15 स्थित पंजाब कांग्रेस भवन में होने वाले समारोह को सफल बनाने के लिए पार्टी संगठन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कार्यक्रम में 8 से 10 हजार कार्यकर्ताओं और समर्थकों के शामिल होने की उम्मीद है।

समारोह में पंजाब कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल सहित केंद्रीय नेतृत्व के प्रतिनिधियों और प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के पहुंचने की संभावना है। पूर्व मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों की मौजूदगी के बीच पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी और नए नेतृत्व के सामने एकजुटता कायम करने की चुनौती प्रमुख मुद्दा रहेगी।

चन्नी और राजा वड़िंग की मौजूदगी पर नजर

इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री एवं जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की मौजूदगी को लेकर खास चर्चा है। दोनों नेताओं की भागीदारी को परगट सिंह के नेतृत्व में पार्टी की एकजुटता के संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में समारोह के दौरान उनकी उपस्थिति और नए प्रदेश अध्यक्ष के साथ उनका तालमेल राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

चन्नी और राजा वड़िंग इन दिनों दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ मतदाता सूची तथा कथित वोट चोरी के मुद्दे पर जारी विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय हैं। ऐसे में चंडीगढ़ में होने वाले कार्यक्रम में उनकी भागीदारी पर सभी की नजरें रहेंगी। पार्टी के लिए यह समारोह केवल नए अध्यक्ष के पदभार ग्रहण करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वरिष्ठ नेताओं के बीच बेहतर समन्वय और संगठनात्मक एकता दिखाने का अवसर भी है।

चुनावी तैयारियों में तेजी लाने की कोशिश

पंजाब कांग्रेस ने आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी की घोषणापत्र समिति की अब तक दो-तीन बैठकें हो चुकी हैं। इसके अलावा अगले सप्ताह से अन्य समितियों की बैठकें आयोजित करने की योजना भी बनाई जा रही है।

परगट सिंह के पदभार संभालने के बाद इन गतिविधियों में और तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और अलग-अलग गुटों के बीच समन्वय स्थापित करना होगा। अब यह देखना अहम होगा कि परगट सिंह संगठन को एकजुट कर चुनावी तैयारियों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा करने में कितने सफल रहते हैं।