उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Mayawati ) के लखनऊ स्थित आवास का घेराव किया। लंबे समय से कानूनी अड़चनों और विवादों में फंसी इस भर्ती के अभ्यर्थियों का कहना है कि वे शासन-प्रशासन से गुहार लगाकर थक चुके हैं और कहीं कोई सुनवाई न होने के कारण वे बसपा प्रमुख के पास आए हैं, ताकि वे दलितों और पिछड़ों के हक व न्याय के लिए आवाज उठा सकें। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला व पुरुष अभ्यर्थी शामिल हुए, जिन्हें मौके पर मौजूद पुलिस ने हिरासत में लेकर जबरन हटाया।
इस घटनाक्रम के बीच बसपा प्रमुख मायावती ने देश में परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के आंदोलन पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने NEET-UG समेत विभिन्न भर्ती व प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले पर कहा कि अभ्यर्थियों और युवाओं के आंदोलन को आम जनता की व्यापक सहानुभूति मिल रही है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव पर उन्होंने आशंका जताई कि इस सियासत में शिक्षा व्यवस्था में सुधार का मूल मुद्दा पीछे छूट सकता है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई और संसद के मॉनसून सत्र में जारी गतिरोध पर बात करते हुए मायावती ने कहा कि सरकार की सख्ती केवल पेपर लीक होने के बाद नजर आती है, जबकि धांधली को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी अग्रिम उपाय नाकाफी हैं।
इसी कारण युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है और संसद का सत्र बाधित होने से जनहित के अन्य जरूरी मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही प्रभावित हो रही है। उन्होंने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं व समर्थकों से ऐसे माहौल में उग्र या निराश होने के बजाय संयमित रहकर अपने मिशन के प्रति अनुशासित रहने की अपील की।
