‘उत्तराखंडियों को घुसपैठिया कहने का हक किसने दिया?’ अखिलेश पर बरसे विनोद चमोली

देहरादून। उत्तराखंड के लोगों को कथित तौर पर ‘घुसपैठिया’ कहे जाने के मुद्दे पर भाजपा ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एवं वरिष्ठ विधायक विनोद चमोली ने अखिलेश यादव के बयान की कड़ी निंदा करते हुए सवाल किया कि क्या उत्तराखंड के नागरिकों को अपने ही देश में रहने और काम करने के लिए किसी से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत है? उन्होंने कांग्रेस पर इस मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तराखंडियों के कथित अपमान पर कांग्रेस नेतृत्व को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
भाजपा प्रदेश मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान विनोद चमोली ने कहा कि उत्तराखंड के लोगों को ‘घुसपैठिया’ कहना बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की टिप्पणी उत्तराखंड के लोगों के प्रति उनकी मानसिकता को उजागर करती है। चमोली ने कहा कि भारत का नागरिक देश के किसी भी राज्य में रह सकता है और काम कर सकता है। ऐसे में उत्तराखंड के लोगों के लिए इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल निंदनीय है।
‘अखिलेश में मुलायम सिंह की उत्तराखंड विरोधी मानसिकता दिखाई देती है’
विनोद चमोली ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के शासनकाल की घटनाओं को याद किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य आंदोलन के दौरान उत्तराखंड के आंदोलनकारियों को दमन, लाठीचार्ज, गिरफ्तारी और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था। उन्होंने 2 अक्टूबर 1994 के मुजफ्फरनगर कांड का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों के साथ हुई घटनाओं को प्रदेश कभी नहीं भूल सकता।
चमोली ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की कथित टिप्पणी से ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तराखंड के प्रति समाजवादी पार्टी की पुरानी सोच में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों ने लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद अलग राज्य हासिल किया है और उनके सम्मान पर किसी भी तरह का सवाल स्वीकार नहीं किया जा सकता।
‘असली दोषी कौन है, जो उत्तराखंड के अपमान पर मौन है?’
भाजपा विधायक ने राज्य आंदोलन के दौरान प्रचलित नारे ‘असली दोषी कौन है, जो दिल्ली में मौन है’ का जिक्र करते हुए कांग्रेस को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय केंद्र में रही कांग्रेस सरकार ने उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सपा सरकार के खिलाफ प्रभावी कदम नहीं उठाए और इस तरह वह भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
चमोली ने कहा कि आज भी स्थिति कुछ ऐसी ही दिखाई दे रही है। उनके मुताबिक, यदि अखिलेश यादव की टिप्पणी पर कांग्रेस नेतृत्व स्पष्ट विरोध नहीं करता, तो इससे कांग्रेस की राजनीतिक जिम्मेदारी पर सवाल उठेंगे। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि क्या वह उत्तराखंड के लोगों को ‘घुसपैठिया’ कहे जाने का समर्थन करती है या इस बयान का विरोध करेगी।
राहुल गांधी से भी जवाब मांगने की तैयारी
विनोद चमोली ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस विपक्षी गठबंधन में साथ हैं, इसलिए अखिलेश यादव की कथित टिप्पणी पर राहुल गांधी को भी अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।
चमोली ने उत्तराखंड के सैन्य योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के लोगों ने देश की सीमाओं की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे प्रदेश के नागरिकों को ‘घुसपैठिया’ कहना उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है।
उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें हरीश रावत, हरक सिंह रावत और प्रीतम सिंह शामिल हैं, से भी इस मुद्दे पर खुलकर बोलने की मांग की। उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस के नेता उत्तराखंड के लोगों के लिए इस्तेमाल किए गए ऐसे शब्दों का विरोध करेंगे और समाजवादी पार्टी से जवाब मांगेंगे?
भाजपा ने कांग्रेस और सपा दोनों को घेरा
चमोली ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी गठबंधन के नेता उत्तराखंड की भावनाओं और सम्मान को पर्याप्त महत्व नहीं देते। उन्होंने कहा कि भाजपा उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास, आंदोलनकारियों के संघर्ष और प्रदेश के नागरिकों के सम्मान के साथ खड़ी है।
उन्होंने अखिलेश यादव की कथित टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए कांग्रेस की चुप्पी को भी शर्मनाक बताया। चमोली ने कहा कि उत्तराखंड के लोगों का अपमान किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा और इस मुद्दे पर कांग्रेस को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण यह है कि उत्तराखंडियों को ‘घुसपैठिया’ कहे जाने के विवाद ने भाजपा को समाजवादी पार्टी के साथ-साथ कांग्रेस पर भी हमलावर होने का मौका दिया है। हालांकि, अखिलेश यादव की टिप्पणी के सटीक संदर्भ और कांग्रेस की आधिकारिक प्रतिक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इस विवाद पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
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